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इन्सुलीन - तकनीक का कमाल

मधुमेह के रोगियों को यदि इन्सुलीन की सूई लेने की सलाह दी जाती है तो अकसर उन्हे पसीना आने लगता है मानों मुसीबतों का पहाड़ टूट पड़ा हो।मगर अब इन्सुलीन लेना इतना सरल हो गया है,मानों बच्चों का खेल हो।न तो कम्पाउन्डर के आने की जरुरत,न तो सूई के कारण दर्द होने की कसमसाहट -बस कलम-नुमे...
सप्ताह विशेष - अरवा चावल से डायबिटीज का खतरा

वैसे तो पुराने समय से ही यह मान्यता रही है कि उसना चावल सेहत के लिए बढ़िया है और अरवा चावल निम्न, मगर हाल में ब्रिटिश मेडिकल जनरल ने जब कई शोधों के निचोड़ में यह प्रकाशित किया कि अरवा चावल खाने वालों में डायबिटीज होने का रिस्क बढ़ जाता है, तो पूरी दुनिया में इसकी खूब चर्चा हो रही है.
हार्वर्ड मेडिकल स्कूल, बोस्टन ( अमेरिका ) के शोधकर्ताओं के अनुसार अगर आप रोज अरवा चावल खाते हैं और खासकर ऐशयन हैं, तो डायबिटीज होने की संभावना 27 प्रतिशत उनके मुकाबले बढ़ जाती है, जो रोज उसना चावल खाते हैं. इस अध्ययन के मुख्य शोधकर्ता डॉ क्यूसुन के अनुसार ऐशियन देशों में बढ़ते डायबिटीज का बड़ा कारण खाद्य पदार्थो को अप्राकृतिक तौर पर रिफ़ाइंड कर उसका पोषक तत्व निकाल देना है. यह सब हम जीभ के स्वाद के लिए कर रहे हैं. कई परिवारों में तो अरवा चावल का इस्तेमाल इस तरह किया जाता है, मानो उसना चावल गरीबी की पहचान हो.
डायबिटीज एवं हार्ट रिसर्च सेन्टर

आर. देवी. डायबिटीज एवं हार्ट रिसर्च सेन्टर (डी. एच. आर. सी.)झारखण्ड का सर्वप्रथम एवं सर्वश्रेष्ठ डायबिटीज सेन्टर है। जिसकी स्थापना 18 जुन 2006 को हुई है। इसके संस्थापक ड़ा. एन. के. सिंह ने अपनी माता जी श्रीमती आर. देवी (राम सँवारी देवी) के नाम पर रखा है।।यह भारत की कोयला राजधानी "धनबाद" में स्थित है जो लगभग धनबाद रेलवे स्टेशन एवं बस स्टैण्ड से 200 मीटर की दूरी पर है। यहाँ मधुमेह एवं ह्र्दय सबंधी बिमारियों का इलाज सुचारु एवं सही ढंग से किया जाता हैं।
डी. एच. आर. सी. के 10 गोल्डेन नियम
01महीने में एक बार अवश्य ब्ल़ड सुगर की जाँच करा लें।
02अगर ब्ल़ड सुगर नियन्त्रित रखेंगे तो डायबिटीज से होने वाले दुष्परिणाम नहीं होगें ।
03नियन्त्रित ब्ल़ड सुगर रखने वाले सामान्य आयु तक जी सकते है।
04जो मरीज अपनी बीमारी के बारे में पूरा जानता है वह ज्यादा दिन जिन्दा रहता है।
05डी. एच. आर. सी. का डायबिटीक प्रोफ़ाइल साल में एक बार अवश्य करायें।
06अगर आप भोजन पर नियंन्त्रण एवं रोज 30 मिनट पैदल चलने की आदत जारी नहीं रखेंगे, तो हमारी सारी मेहनत बेकार हो जायेगी।
07जब जरुरी हो, इन्सुलीन अवश्य लें। यह अमॄत के समान है।
08एस. एम. बी. जी. की आदत डालें - ग्लुकोमीटर द्वारा स्वयं ब्ल़ड सुगर जाँचें ।
09माँ-बाप में किसी को डायबिटीज है तो बच्चों का सालाना ब्ल़ड सुगर जाँच कराएँ एवं बचाव के लिए शुरु से भोजन का नियंन्त्रण एवं रोजाना 30 मिनट पैदल चले।
10हाइपोग्लायसिमिया की जानकारी अवश्य लें।
मधुमेह सुरक्षा - एक नजर
- By - Dr. N. K. Singh
यह अनुमान किया गया है कि अभी भारत में करीब 55 मिलीयन लोगों को मधुमेह की बीमारी हो चुकी है जिसमें करीब 98% लोग 'टाइप-2' डायबिटीज से प्रभावित हैं। और यही स्वरुप इस देश की अहम समस्या है। दो द्शक पहले मधुमेह की व्यापकतादर ग्रामीण क्षेत्रों में 1.5% तथा शहरी क्षेत्रों में 2.1% पायी गयीथी; अब ग्रामीण क्षेत्रों में 5-7 % तथा शहरी क्षेत्रों में 12 से 22 % तक जा पहुँची है। यह भी विचारणीय प्रश्न है कि 2025 तक भारत मधुमेह 170% की दर से बढ़ेगा, यह विश्व स्वास्थ्य संगठन का कहना है। जिस तेजी से मधुमेह भारत में फैल रहा है उस अनुपात में हमारी स्वास्थ्य व्यवस्था समस्या से निबटने में बिल्कुल पंगु है।
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