मधुमेह में टहलना 'रामबाण'



मधुमेह में टहलना भी एक बड़ा उपचार

मधुमेह के रोगियों के लिए व्यायाम की आवश्यकता और उपादेयता पर सही ध्यान देना, उनके स्वस्थ रहने की दिशा में सबसे अधिक महत्वपूर्ण कदम है। भारतीय मनीषियों ने इसके महत्व को समझ कर ही इसे उपचार का आवश्यक अंग माना था। स्थूल शरीर वाले रोगियों को उन्होंने विभिन्न प्रकार के खेलकूद, लम्बी दूरी तक टहलने की बात, कुएं खोदने जैसा कोई काम करने के लिए भी प्रेरित किया था। प्रसिद्ध मधुमेहविद जांसलिन ने आधुनिक काल में व्यायाम को चिकित्सा का एक महत्वपूर्ण अंग माना है। विवादास्पद यूजीपी अध्ययन के परिणाम जब सामने आए और दवाओं की सुरक्षा के बारे में प्रश्न चिन्ह उठाए गये तब भोजन और व्यायाम के द्वारा मधुमेह को ठीक करने का तरीका आदर्श माना गया। अगर आप यह समझ जायें की व्यायाम किस तरह मधुमेह के नियंत्रण में मदद करता है, तो निश्चित रूप से नियमित तरीके से उसे करने में आपकी तत्परता रहेगी।


व्यायाम का वैज्ञानिक विशलेषण

एक सामान्य आदमी में काम करने की ऊर्जा ग्लुकोज और फ्री फैटी एसिड के आक्सीडेशन से मिलती है। आराम के समय नब्बे प्रतिशत ऊर्जा , मांसपेशियों को फ्री फैटी एसिड के आक्सीडेशन से मिलती है। जब शरीर को ग्लुकोज की मांग ज्यादा होती है, तो मांसपेशियों और लीवर के ग्लायकोजन, ग्लुकोज में बदलने लगते हैं, और इससे भी काम न चला तो अन्य स्रोतों से ग्लुकोज का उत्पादन स्वतः होने लगता है। जब हम थोड़ा व्यायाम करते हैं तो पहले मांसपेशियों का ग्लायकोजन ग्लुकोज में बदलता है, इसकेबाद फिर लीवर का। यदि व्यायाम जारी रहता है तो लीवर अन्य स्रोतों से नया ग्लुकोज बनाना शुरू कर देता है। अगर तीस मिनट से ज्यादा व्यायाम किया जाय तो मांसपेशियों की ऊर्जा मुख्यतः फ्री फैटी एसिड से मिलती है। व्यायाम के बाद मांसपेशियों और लीवर का ग्लायकोजन-स्टोर पहले की तरह होने लगता है, इस प्रक्रिया में इन्सुलीन का बड़ा हाथ है।

खून में प्रवाहमान ग्लुकोज शरीर की कोशिकाओं के अंदर जाकर रासायनिक प्रक्रिया द्वारा ऊर्जा उत्पन्न करता है। मगर खून से यह ग्लुकोज कोशिकाओं में कैसे पहुंचे ? अग्नाशय ग्रंथि के बीटा सेल्स से स्रावित इन्सुलिन के लिए कोशिका के उपर ऐसे विशिष्ट स्थल होते हैं जिसे इन्सुलीन रिसेप्टर कहते हैं,। इसी स्थल पर खड़ा होकर इन्सुलीन अपनी विशेष प्रक्रिया द्वारा ग्लुकोज को रक्त से कोशिकाओं के अन्दर घुसने के लिए प्रेरित करता है।शरीर में इन्सुलीन नहीं रहे तो ग्लुकोज के अणु अपनी मनमानी करते हुए आवारागर्दी शुरू कर देते हैं। कोशिकाओं में ग्लुकोज की कमी हो जाती है, और शरीर में ऊर्जा का आभाव हो जाता है। ठीक उसी तरह जैसे समुद्र के किनारेआप खङें हों मगर प्यासे।अब उस खारे पानी का क्या करें? इनसुलीन की कमी इसी तरह के हालात पैदा करती है। रक्त में ग्लुकोज की मात्रा बढ़ती जाती है, ग्लुकोज की कमी नहीं रहती है मगर कोशिकाएँ ग्लुकोज के बिना प्यास से मरी जाती हैं।

इस तरह के हालात में थोड़ा व्यायाम मांशपेशियों को इन्सुलीन के प्रति संवेदनशील बना देता है, इन्सुलीन रिसेप्टर की संख्या बढ़ा देता है, और इस तरह रक्त से कोशिकाओं के अंदर ग्लुकोज का ट्रांसपोर्ट संभव हो जाता है। व्यायाम के कारण शरीर के विभिन्न हारमोनों में ऐसा परिवर्तन होता है कि ग्लुकोज का उपयोग सही दिशा में हो सके। यह एक जटिल रासायनिक प्रक्रिया है।


व्यायाम चिकित्सा के रुप

मधुमेह के रोगी केवल भोजन के नियंत्रण पर हों, दवाओं का इस्तेमाल कर रहे हों या इन्सुलीन का इंजेक्शन ले रहे हों, सभी के लिए व्यायाम की महत्ता है। इस प्रोग्राम को शुरू करने से पहले इसके फायदे और रिस्क का आकलन जरूरी होता है। इसके नियमित प्रयोग से बहुत से रिस्क फैक्टर्स कम हो जाते हैं। इन्सुलीन रिसेप्टर की संख्या बढ़ने तथा इन्सुलीन के प्रति कोशिकाओं के संवेदनशील होने पर व्यायाम का मुख्य प्रभाव होता है। इसके कारण रक्त की लाल कोशिकाओं में आक्सीजन वहन की क्षमता भी बढ़ती है और ऊतकों को ज्यादा आक्सीजन मिलता है। उनमें नवजीवन का संचार होता है। व्यायाम कोलेस्टरोल और ट्रायग्लायांसेराइड की मात्रा में कमी करके हृदय आघात होने की संभावना भी कम कर देता है। यह रक्तचाप के नियंत्रण में भी मदद करता है। मधुमेह के रोगियों के आसपास उच्च रक्तचाप, हृदय आघात और स्ट्रोक दीवानों की तरह मंडराते रहते हैं कि कब लिफ्ट मिले और वे सीने से चिपक जाएं। व्यायाम करने से इस प्रवृति से बचाव होता है।

व्यायाम का प्रभावकारी असर हो सके इसके लिए एक नियम में बंधना जरूरी है। ऐसा व्यायाम जो सरल भी हो और आपकी जीवन प्रणाली से मेल भी खाता हो। चिकित्सा के तौर पर प्रभावकारी होने के लिए आप सप्ताह में तीन से पांच दिन कम से कम व्यायाम अवश्य करें। रोज करें तो अति उत्तम। इसकी अवधि पंद्रह से साठ मिनट के बीच होनी चाहिए। व्यायाम के लिए सुबह का समय उत्तम है मगर शाम को भी किया जा सकता है, लेकिन पेट खाली होना चाहिए।

मधुमेह के रोगी व्यायाम चिकित्सा की सलाह के बाद ही शुरू करें। दवा या इन्सुलीन की मात्रा जो आप ले रहे हैं उसके अनुसार व्यायाम का आकलन होना चाहिए। रक्तचाप, हृदय आघात या एनजाइना संबंधी शिकयात, आंखों और गुर्दों पर मधुमेह के असर का आंकलन, ई.सी.जी. या टी.एम.टी. की जरूरत आदि का जायजा हो जाये-तब होती है शुरूआत इस व्यायाम रूपी उड़ान की।

टहलने से उतम कुछ भी नहीं

एरोबीक व्यायाम का मतलब होता है व्यायाम की वह पद्धति, जिससे रक्त में आक्सीजन वहन की क्षमता बढ़े। टहलना, दौड़ना, साइकिलिंग, जोगिंग, तैरना, स्कीपिंग, बैडमिन्टन, टेनिस, बास्केटबाल आदि एरोबिक व्यायाम हैं। हृदय और श्वसन की क्रियाओं पर इस पद्धति के व्यायाम के प्रभावकारी असर हो जाता है। आइसोमेट्रिक व्यायाम मधुमेह के रोगियों के लिए अनुकूल नहीं है, जैसे वेट लिफ्टिंग, हैंडग्रिप आदि।

निराशा से निकलिए। बड़ी प्लानिंग की कोई जरूरत नहीं। तेजी से टहलना व्यायाम की सबसे अच्छा, सरलतम और सबसे सुरक्षित पद्धति है।

हिपोक्रेटस ने बहुत पहले कहा था-टहलना सबसे बड़ी दवा है निरोग रहने के लिए। इसमें कोई पैसा नहीं लगता, ज्यादा कुछ सीखना नहीं पड़ता, ज्यादा माथापच्ची नहीं, कुछ घनचक्कर नहीं। बस घर से निकलिए। और बहानेबाजी नहीं- कृपया चलिए हेल्थवाक पर। लेकिन व्यायाम के तौर पर टहलना केवल एक पैर के आगे दुसरे पैर को रखना नहीं है सावधान।