डायबिटीज और सिगरेट


यह डायबिटीज में जहर से भी ज्यादा खराब है


डायबिटीज में सिगरेट अत्यंत घातक

धुम्रपान का असर
[प्रति हजार पर मरणदर दस साल में]
धुम्रपान करने वाले सामान्य लोगों में -23.9 प्रतिशत
धुम्रपान करने वाले मधुमेह रोगियों में - 68.7 प्रतिशत


धूम्रपान वैसे तो किसी भी स्वस्थ व्यक्ति के लिए अत्यंत हानिकारक है मगर डायबिटीज के मरीजों के लिए यह आदत स्वयं को मौत के मुंह में ढकेलने सदृश्य है। समाज में कम उम्र के लोगों में धूम्रपान की आदत तेजी से बढ़ रही है।

*सिगरेट में मुख्यतः निकोटिन नाम का तत्व है जो मूड को बदलता है और ज्यादा सिगरेट पीने के लिए बाध्य करता है। सिगरेट पीने के बाद यह निकोटिन मात्र सात सेकेंड में मस्तिष्क में पहुंच जाता है और एक विशिष्ट जैव रासायनिक प्रक्रिया शुरू करती है।

*सिगरेट को लेकर पहली बात तो यह है कि इसे पीने से डायबिटीज होने की संभावना बढ़ जाती है जिसे नर्सेज हेल्थ स्टडी जैसे महत्वपूर्ण शोध के जरिये परखा जा चुका है। यह इस बात पर निर्भर करता है कि किस उम्र में धूम्रपान शुरू हुई है और एक दिन में कितनी सिगरेट पी जा रही है। धूम्रपान द्वारा इन्सुलीन रेसिसटेंट यानि इन्सुलीन की नाकामी प्रभावी हो जाती है और पेट के ऊपरी भाग में चर्बी जमने का खतरा बढ़ जाता है।


*इसके कारण डायबिटीज के मरीजों में बल्डसुगर का नियंत्रण समुचित नहीं हो पाता। डायबिटीज के जो दुष्प्रभाव होते हैं, उसमें धूम्रपान बढ़ोत्तरी कर देता है। इसमें मुख्यतः जानलेवा हृदयाघात अथवा कोरोनरी हृदय रोग का होना है।

हाल में हुए नये शोधों से पता चला है कि सिगरेट डायबिटीज के मरीजों में स्ट्रोक यानी लकवा की बीमारी पैदा करने में महत्पूर्ण ढंग से सहभागी है।

*धूम्रपान डायबिटीज के माइक्रोवासकुलर कम्पलीकेशन्स जैसे किडनी की खराबी एवं नसों की खराबी (न्यूरोपैथी) के लिए भी जिम्मेवार है। सिगरेट पीने से डायबिटीज के मरीजों में अल्बुमीन जाने की संभावना बढ़ जाती है। यह आनेवाली नेफ्रोपैथी यानी गुर्दे की खराबी का परिचायक है। न्यूरोपैथी यानी नसों की खराबी डायबिटीज में अत्यंत पीड़ादायक होती है। यह संभावना बढ़ जाती है।

*सिगरेट के कारण रेटीनोपैथी यानी आखों की खराबी का मामला पूर्णतः परिभाषित नहीं किया जा सका है। कई ऐपिडियोमॉलोजिक शोधों ने इसमें सिगरेट की सहभागिता नहीं पायी है लेकिन बहुत से शोधों ने पाया है कि धूम्रपान के कारण रेटिना में रक्तप्रवाह की कमी होती है और वहां ऑक्सीजन ठीक से नहीं पहुंचती। यह अवस्था आंखों में रेटिनोपैथी पैदा करने में सक्षम है।

इस तरह इन नये शोधों के आलोक में यह निश्चित तौर पर कहा जा सकता है कि डायबिटीज के मरीजों को धूम्रपान तुरंत छोड़ देना चाहिए। उनका शरीर वैसे हीखराब मेटाबोलिक अवस्था से गुजर रहा होता है। सिगरेट उस अवस्था को और दूषित एवं नाकाम करती है।

आजकल सिगरेट छोड़ने के तरीकों पर काफी कुछ काम हुआ है मगर सजगता और दृढ़इच्छाशक्ति अत्यंत महत्पूर्ण है। कई मरीजों ने सही जानकारी पाकर तुरंत सिगरेट छोड़ने का निश्चय कर लिया मगर कई मरीज बार-बार चेताने के बावजूद सिगरेट नहीं छोड़ते हैं। उनमें डायबिटीज के कम्पलीकेशन्स जल्दी आ जाते हैं और शरीर पूर्णतः नाकाम हो जाता है। इस बात पर गहन चिंतन और सजगता की जरूरत है।