इन्सुलीन अवश्य जानिये



इन्सुलीन अवश्य जानिये इन तथ्यों को

  • जब चिकित्सक कहें, इन्सुलीन लेने में आना कानी न करें। मधुमेह की चिकित्सा के दौरान ऐसी स्थिति आती है, जब दवाइयाँ नाकाम हो जाती है। तब इन्सुलीन आपके जीवन में नई आशा और नवजीवन लेकर आता है।
  • कितने तरह के इन्सुलीन बाजार में है?

    a). रैपिड एक्टिंग इन्सुलीन

    b). इन्टरमिडियेट एक्टिंग इन्सुलीन

    c). प्रीमिक्सड इन्सुलीन

    d). लॉन्ग एक्टिंग इन्सुलीन

  • बिफ इन्सुलीन आजकल प्रयुक्त नहीं किये जाते है। नए इन्सुलीन में पोरसीन एवं ह्यूमन टाइप आते हैं। ये दोनों अच्छे हैं। पारेसीन इन्सुलीन ह्यूमन से सस्ता है।
  • इन्सुलीन का इन्जेक्शन चमड़े के नीचे दिया जाता है।

  • इन्सुलीन का इन्जेक्शन 20 से 30 मिनट खाने के पहले लेना जरुरी है।(रैपिड एक्टिंग इन्सुलीन एनालोग 15 मिनट खाने के पहले या खाने के तुरंत बाद लिया जाता है।

  • इन्सुलीन चिकित्सा से वजन का बढ़ना या थक्का बनने की प्रक्रिया शुरु होने का डर प्रैक्टिकल ढंग में नगण्य है।

  • इन्सुलीन को 4 से 8 डिग्री सेल्सीएस पर स्टोर करना चाहिए। देने के पहले हथेलियों से मल कर इसे सामान्य तापमान पर लायें। जिनके पास फ्रिज न हो वे इन्सुलीन को घड़े में रख सकते हैं।

  • इन्सुलीन को सूई मरीज को स्वयं लेनी चाहिए।

  • इन्सुलीन लीजिए, यह अमॄत है, इसका कोई मुकाबला नहीं (अगर दवाओं से सुगर कन्ट्रोल नहीं हो तो तुरंत शुरु कीजिए)।

  • जहां इन्सुलीन दे सकते हैं - पेट में लेने से (चमड़े के नीचे) इन्सुलीन जल्दी शरीर में चला जाता है, उसके बाद बांहो और फिर जांघों एवं कुल्हे के पास इसका शरीर में घुलने का क्रम हैं। इसलिए एक ही एरिया में इन्सुलीन लें, तुरत तुरत एरिया न बदलें। इन्जेक्शन के बाद एरिया का व्यायाम करने से घुलने की दर बढ़ जाती है, जो कि अपेक्षित नहीं है। जिस जगह पर इन्सुलीन आपने लिया है। अगले दिन उस जगह से तीन अंगुली की दूरी पर ही दुसरा इन्जेक्शन लें। जहाँ आप सूई ले सकते हैं

  • कभी कभी थोड़े दिन का इन्सुलीन लेना भी शरीर की मृतप्राय बीटा कोशिकाओं को नया जीवन दे देता है। अतः यह भ्रम हटा दें कि एक बार इन्सुलीन शुरू किया तो जिन्दगी भर इन्सुलीन ही लेना होगा।

  • इन्सुलीन चिकित्सा से वजन का बड़ना या थक्के बनने की प्रक्रिया शुरू होने का डर प्रैक्टिकल ढंग में नगण्य है।

  • इन्सुलीन शुरु सूई मरीज को स्वयं लेनी चाहिए।

  • जिस जगह इन्सुलीन ले रहे हों, उसी के आस पास तक कुछ दिनों तक लें। क्योंकि प्रत्येक क्षेत्र में इन्सुलीन के अवशेषित होने का क्रम अलग-अलग है।

  • अगर सम्भव है ग्लुकोमीटर खरीद लें और स्वयं अपने ब्लड सुगर की जांच करें। इसे एसएम बीजी कहते हैं। यह एक आदर्श पद्धित है मोनिटरिंग के लिए।

 


इन्सुलीन लीजिए, यह अमृत है, इसका कोई मुकाबला नहीं

(अगर दवाओं से सुगर कन्ट्रोल नहीं है तो तुरंत शुरु कीजिए)