इन्सुलीन पंप




चीज अच्छी है मगर खर्च आता है ळाख रूपया से ज्यादा

इन्सुलीन पंप अब भारत में भी उपल्बध हो गया है। यह इन्सुलीन लेने की दिशा में एक उल्लेखनीय उपलब्धि समझी जा रही है। इस विधि से इन्सुलीन लेने से मधुमेह का नियंत्रण ज्यादा प्राकॄतिक तौर पर होता है। इसलिए मधुमेह के द्वारा होने वाले दुष्परिणामों से बचने में सहायता मिलती है।


'इन्सुलीन पंप' एक मोबाइल फोन की तरह का एक यत्रं है

इसमे केवल फास्ट एक्टिंग इन्सुलीन भरा जाता है। 'कम्पुयूटराइजड' डिस्पले एवं बटनों द्वारा शरीर में कितना इन्सुलीन भेजना है, उसे सेट कर दिया जाता है। एक अति महीन सुई पेट में लगा दी जाती है सुई के कनेक्शन पर पतली नली द्वारा इन्सुलीन पंप के मशीन से जोड़ दी जाती है। इस पंप को जैसे लोग मोबाइल फोन को कमर में वेल्ट में बांध कर रखते हैं, वैसे ही लगा दिया जाता है। अब आप दिन भर अपना काम करते रहत हैं। मशीन सेट टाइम के अनुसार लगातार इन्सुलीन शरीर में स्वतः भेजता रहता है।


इन्सुलीन सेट करने के दो तरीके हैं

एक को बेसल सेटिंग कहते हैं। जिसके द्वारा चौबीसों घंटे इन्सुलीन एक निर्धारित मात्रा में भेजी जाती है। दूसरी पद्धति को बोलस सेटिंग कहते हैं। इसमें खाना के बाद जब शरीर को ज्यादा इन्सुलीन की जरूरत होती है, तब अतिरिक्त मात्रा पंप द्वारा शरीर में भेजी जाती है। जब आप इंजेक्शन द्वारा इन्सुलीन लेते हैं तो दिन में एक, दो या तीन बार इन्सुलीन दिया जाता है। यह मात्रा उस समय की मांग को पूरी करती है, किंतु शरीर को इन्सुलीन की थोड़ी बहुत मात्रा की जरूरत हर समय होती है। प्राकृतिक तौर पर शरीर में अग्नाशय द्वारा हर 10 या 14 मिनट पर थोड़ा इन्सुलीन स्रावित होता रहता है। लॉग -एक्टिंग इन्सुलीन के इंजेकशन देने से जो प्रभाव शरीर में आता है वह प्राकृतिक तौर से स्रावित होने वाले इन्सुलीन से समानता नहीं रखता।


इसके फायदे

इन्सुलीन पंप द्वारा जो इन्सुलीन शरीर में जाता है वह लगभग प्राकृतिक जैसा ही है। इस पद्धति द्वारा शरीर में जरूरत से ज्यादा ब्लड सुगर घटने (हाइपोग्यसिमिया) का भी डर नहीं रहता। ब्लड सुगर में ज्यादा उतार-चढ़ाव भी नहीं होता। भोजन के हेर-फेर से ब्लड सुगर में जो बढ़ोत्तरी होती है, उससे भी निपटने में यह यंत्र सक्षम है। इन्सुलीन पंप का प्रयोग करने वाले मरीजों का ग्लायकोसालेट हीमग्लोबीन भी स्थिर रहता है, जो अच्छे नियंत्रण की पुष्टि करता है। इस यंत्र के साथ एक रिमोट कंट्रोल प्रोग्रामर भी आप खरीद सकते हैं इसे पॉकेट में रख सकते हैं और जब इच्छा हो निकाल कर यंत्र की सेटिंग कर सकते हैं।

 

 


पाकेट पर भारी है तकनीक

भारत में अभी इस यंत्र की कीमत ढाई लाख है। यदि ग्लुकोज सेंसर मशीन के साथ ले तो यह चार लाख में आता है। ग्लुकोज सेंसर मशीन स्वतः ब्लड सुगर की जांच-चौबिसों घंटे करती रहती है और उसी के अनुसार इन्सुलीन पंप में इन्सुलीन की मात्रा निर्धारित होती है। निश्चित तौर पर तत्काल यह यंत्र सभी लोग खरीद नहीं सकेंगे। केवल धनी व्यक्ति ही इसका उपयोग कर पायेंगे। मगर उम्मीद है कि अगले कुछ सालों के अंदर इसकी कीमत इतनी कम हो जायेगी कि मध्यम आय का व्यक्ति भी इसे खरीद पाये। अभी भारत में मिनीमेड नाम से मेडट्रोनिक इंटरनेशनल कंपनी के द्वारा यह उपलब्ध कराया गया है।

मधुमेह के रोगियों को अब जल्दी इन्सुलीन लेने की सलाह दी जाती है। इन्सुलीन देने के तरीकों में लगातार तकनीकी सुधार हो रहा है, आज इंजेक्शन का लेना लगभग दर्द रहित पेन टेकनीक द्वारा हो गया है। इन्सुलीन पंप का उपयोग अत्यंत सरल एवं सुरक्षित है। मगर इसकी कीमत भारी व्यवधान पैदा कर रही है। चिकित्सा विज्ञान की ऊंची उड़ान जारी है। मगर आज भी मधुमेह के नियंत्रण में सही खान पान और रोज 30 मिनट तेज पैदल चलने से उत्तम कुछ नहीं है। भारत विश्व का डायबिटीक कैपीटल है। छह करोड़ रोगियों में कुछ हजार ही इंसुलीन पंप खरीद सकते हैं। मगर पैदल चलना भगवान ने सबके लिए सुलभ कर रखा है।