ग्लारजीन इन्सुलीन



ऐसा इन्सुलीन जिसे एक बार दिया जाए तो असर 24 घण्टे तक बना रहे



1. 'ग्लारजीन इन्सुलीन' काफी प्रभावी

इन्सुलीन 'ग्लारजीन' एक नये किस्म का इन्सुलीन है। अप्रैल 2000 में पहली बार अमेरिका में एफ.डी.ए. ने इसे 'टाइप-1' एवं 'टाइप-2' डायबिटीज के मरीजों में प्रयोग के लिए सुरक्षित करार दिया। अभी तक बजार में कोई ऐसा इन्सुलीन नहीं था जिसे एक बार दिया जाए तो असर 24 घण्टे तक बना रहे। जो इन्सुलीन बाजार में उपलब्ध ते उनकी कार्यप्रणाली प्राकॄतिक तौर पर पर शरीर में नहीं होती थी और 'एक्शन' के बाद असर कुछ घंटे में समाप्त हो जाता था।

मगर इन्सुलीन ग्लारजीन को जब चमडे के नीचे दिया जाता है तो वहाँ माइक्रोप्रीसीपीटेट बन जाता है और बहुत धीर-धीरे 24 घंटे तक रक्त में इन्सुलीन स्रावित होता रहता है । यह शरीर में एकदम नेचुरल ढंग से इन्सुलीन की मात्रा पहुंचाता है जिसके कारण डायबिटीज में बल्डसुगर का नियंत्रण बहुत अच्छे ढंग से होता है, साथ ही सुगर के अत्यधिक कमने का डर भी नहां रहता है । अन्य इन्सुलीनों की अपेक्षा इसकी पूरी मात्रा की जरूरत भी कम होती है । यदि कोई मरीज लेंटे इन्सुलीन की 40 यूनिट ले रहा हो और इस पर ब्लडसुगर नियंत्रित हो तो ग्लारजीन शुरू करने पर पूरी मात्रा में 30 प्रतिशत की कमी करनी पड़ती है ।

भारत में पिछले 4-5 सालों से इन्सुलीन ग्लारजीन उपलब्ध है । शुरू में इसके 10 मिली. वायल की कीमत करीब 2 हजार थी और नयी पेन तकनीक में यह उपलब्ध नहीं था । इसके कारण यह इन्सुलीन बहुत ज्यादा लोकप्रिय नहीं हो सका । अभी हाल मं लैंटसआप्टीसेट नाम से पेन तकनीक में यह इन्सुलीन बाजार में उपलब्ध हुआ है । एक लैंटस आप्टीसेट में करीब 3 मि.ली. इन्सुलीन ग्लारजीन (300 यूनिट) होता है । अभी इसकी कीमत करीब 850 रूपये है । पेन तकनीक में डोज को डायल कर सीधे चमड़े के अंदर पुश कर दिया जाता है । यह अत्यंत सरल, सुरक्षित और दर्दरहित तकनीक है । जिन मरीजों को इन्सुलीन की सूई का भय सताता रहता है, उनके लिए तो यह वरदान है ।

कई शोधों में इन्सुलीन ग्लारजीन द्वारा ब्लडसुगर नियंत्रित करना आसान पाया गया है । इसके साथ ही डायबिटीज नियंत्रण के अन्य मानकों को भी प्राक़ृतिक तौर पर रखने में सहायता मिली है । बहरहाल, गर्भावस्था में इस नये इन्सुलीन के उपयोग के लिए उपयुक्त ऐपिडेमियोलाजिकल डाटा नहीं है । इस इन्सुलीन को नाश्ते के समय देना ज्यादा उपयुक्त पाया गया है । ग्लारजीन का उपयोग खाने वाली दवाइयों के साथ किया जा सकता है । आने वाले समय में कई तरह के नये इन्सुलीन एनालॉग यानी इन्सुलीन सदृश्य रसायनों के उपलब्ध होने की संभावना है । डायबिटीज के मरीजों का जीवन इससे ज्यादा सुखमय होगा ।


2. इन्सुलीन डेटीमीर

लेभीमीर नाम से पेन तकनीक में उपलब्ध है।यह लान्ग ऐक्टिंग इन्सुलीन है।