मधुमेह - कुछ तथ्य


Style Disorder?

With or Without genetic predisposition

खराब जीवन शैली से हुई बीमारी

क्या गाँव, कस्बे और शहर में

मधुमेह होने के दर में अन्तर है

यह शहरी विलासी जीवन

का प्रतीक तो नहीं

शहरी क्षेत्र - 15 -22 %

गाँव, देहात - 2 - 8 %

व्यस्तता को राम राम

शरीर हो रोगी तो क्या फायदा?

रोज शारीरिक मेहनत करें।

रिस्क मधुमेह होने का

20% - घर में किसी एक को हो

40% - माँ-बाप में किसी एक को बीमारी हो

70% - एक को बीमारी हो, दुसरा डायबेटिक फैमली से हो

99% - माँ-बाप दोनो को हो

इन्सुलीन के बिना सब सूना

व्यायाम से इन्सुलीन रिसेप्टर की संख्या बढ़ जाती है, ज्यादा संवेदनशील हो जाते हैं।



विचित्र तमाशा!

चीन में मधुमेह दर - 1%, मारीशस में जा बसे चाइनीज में मधुमेह दर - 20%

आलसी / भोगवादी / विलासी जिन्दगी / आधुनिकता की मार।

सावधान

 


सन 2011 में डायबिटीज पर नया क्या है?

1. ग्लायकोसालेटेड हीमोग्लोबीन टेस्ट - सबसे महत्वपूर्ण टेस्ट बन कर उभरा है। यह डायबिटीज की डायगनोसिस एवं कंट्रोल को जानने का सबसे अच्छा तरीका है। इसकी रिडिंग यानि 7 प्रतिशत कम है तो डायबिटीज का नियंत्रण ठीक चल रहा है। इसे हर तीन महीने पर कराना जरूरी माना गया है। नई तकनीक से मात्र 5 मिनट में इस टेस्ट की रिपोर्ट मिल जाती है।

2. लीराग्लुटाईड दवा नई आशा बनी है जी.एल.पी -(1) ग्रुप की यह दवा रोज सूई द्वारा दी जाती है। यह न केवल डायबिटीज का सही नियंत्रण करती है बल्कि इसके लेने से वजन भी कमता है और लिपिड प्रोफाईल भी सुधरता है। मंहगी और ईन्जेक्शन के रूप में उपलब्ध होने के कारण इस दवा की लोकप्रियत पर प्रश्नचिह्न लगा हुआ है।

3. सीटाग्लीपटीन एवं विलाडग्लीपटीन दवा का प्रयोग डायबिटीज के प्राकृतिक तौर पर सही नियंत्रण के लिए उपयुक्त पया गया है। धीरे-धीरे दूरी दुनिया में इन दवाओं का उपयोग बढ़ता जा रहा है। मगर यह ग्लीमीपीराइड ग्रुप की दवा को पीछे छोड़ देगी या नही, अभी नही कहा जा सकता।

4. मेटफारमिन सबसे सुरक्षित और फस्ट लाईन दवा का अभी बनी रहेगी। दिन ब दिन इस दवा के नए गुणों का खुलासा हो रहा है।

5. रोजुभास्टेटीन दवा स्टेटीन ग्रुप की दवा है और जुपीटर ट्रायल के बाद सुपर स्टेटीन के रूप में इसी साल इसका प्रयोग बढ़ा है। डायबिटीज के मरीजों को लगातार स्टेटीन ग्रुप की दवा लेने की सलाह दी गयी है भले ही उनका लिपिड प्रोफाईल समान्य हो।

6. अरटिफिशियल पैनक्रियाज वस्तुतः इन्सुलीन पम्प का ही विकसित तकनीक है। अत्यन्तः दुरुह और मंहगी होने के कारम इसकी लोकप्रियता पर भी प्रश्नचिह्न बना रहेगा।

7. डायबिटीज से पूरे क्योर पर जो न्यूज आते रहते हैं उनकी अभी प्रैक्टिकल वैधता कुछ भी ही है। आइजलेट सेल्स ट्रान्सप्लान्टेशन या स्टेम सेल्स के प्रोयग की बात अभी प्रयोगत्मक तौर पर ही हुई है। निकट भविष्य में इनकी उपलब्धता की आशा में रहना निर्रथक है।

8. इन्सुलीन का बक्कल स्प्रे श्रोया कम्पनी द्वारा उपलब्ध तो हुआ है मगर व्यावहारिक तौर पर इसकी सफलता और लोकप्रियता पर ग्रहण लग गया है। मरीज सूई द्वारा ही इन्सुलीन लेना ज्यादा पसन्द कर रहे है।

9. सन 2009 में ग्लारजीन इन्सुलीन द्वारा कैन्सर होने की बात सामने आयी। मगर आज भी दुनिया में ग्लारजीन इन्सुलीन का इस्तेमाल हो रहा है। इस बात में कितना दम है इस पर भी प्रश्न चिह्न लगा हुआ है।

10. पिछले साल रोजीग्लीटाजोन दवा द्वारा हार्टऐटैक होने के खतरे को लेकर भी खूब हल्ला मचा। बाद में यह कहा गया कि सावधानी से इस दवा का प्रयोग किया सकता है। अमेरीका में भी इस दवा का उपयोग जारी है।

11. मरीजो को यह याद रखना चाहिए कि नवीनतम जानकारी यही है कि दुनिया में इन्सुलीन का पर्याय कुछ भी नही है। सहीखान पान और नियमित व्यायाम की महत्ता सर्वोपरी है। योग, प्राणायाम और ध्यान डायबिटीज के बचाव और नियंत्रण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। यहा शार्टकट का कोई रास्ता नही है।

12. सबसे महत्वपूर्ण जानकारी यही है कि जिस मरीज का ब्लड सुगर नियंत्रित रहेगा (यानि ग्लायकोसालेट हीमोग्लोबीन 7 प्रतिशत से नीचे हो) उसे बीमारी के खतरनाक दुष्परिणामों से निजात मिलती रहेगी।


बिना खून निकाले अब शुगर की जाँच सम्भव

अभी हाल में मोनट्रीयल ,कनाडा में इन्टरनेशनल डायबेटिक फेडेरेशन का सम्मेलन [18.10.09-22.10.09]सम्पन्न हुआ। सम्मेलन के दौरान स्काउट डी.एस नामक मशीन को दिखाया गया जिससे बिना रक्त निकाले शुगर की मात्रा जानी जा सकती है। ब्लड शुगर जाँच के लिए अब नई तकनीक से बिना खून निकाले स्क्रीनींग सम्भव है। चित्र में दिखाए गये स्थिति के अनुसार हाथ को मशीन के ऊपर रखा जाता है। मशीन चमडे के संसगॅ में आते ही शुगर की मात्रा दिखा देती है।इसमें फास्टिंग की आवश्यकता नहीं होती।कम्पनी ने दावा किया है कि यह टेस्ट फास्टिंग शुगर एंव ग्लायकोसाइलेटेड हीमोग्लोबीन टेस्ट से ज्यादा संवेदनशील है।अभी यह टेस्ट-तकनीक सभी जगह उपलब्ध नही है। यह मशीन काफी मँहगी भी है..


एक अनार, सौ बीमारी

पिछले कुछ वर्षो से अमेरिका और ब्रिटेन में अनार की बिक्री में जबरदस्त इजाफा हुआ है। इसका बड़ा कारण मीडिया द्वारा अनार के गुणों का जनता तक पहुचया जाना है। आयुर्वेद में हजारों वर्षों से अनार को मेडिसिन के तौर पर अपनाया गया है। अनार के वृक्ष की छाल से डायरिया, डिसेंट्री और पेट के कीड़ों का इलाज होता है। अनार का रस और बीजों को हृदय के लिए टानिक का खिताब दिया गया ह। 2006 के बाद दुनिया के प्रतिष्ठित मेडिकल जरनलों में छपे शोधों ने अनार के जूस को हृदय की कोरोनरी डिजीज के लिए रामवाण सिद्ध किया। रक्त में बढ़े खराब एलडीएल कोलेस्ट्राल को कम करने में नब्बे प्रतिशत तक की क्षमता अनार में पायी गयी। अच्छे एचडीएल कोलेस्ट्राल को बढ़ा कर एवं लिपिड का आक्सिडेशन रोक कर कोरोनरी नलियों में जमी चर्बी को स्थिर करने और हटाने में भी अनार को समक्ष पाया गया। जब मीडिया ने इन शोधों को प्रकाशित किया, तो अमेरिका एवं ब्रिटेन में अनार का जूस पीने की होड़-सी लग गयी। अनार का जूस बेचने वाली आरजेए फूड कंपनी 2006 में प्रति महीने मात्र 50,000 लीटर जूस बेच पा रही थी। आज ब्रिटेन में यह कंपनी 500,000 लीटर अनार का जूस प्रति महीने बेच रही है।

अनार में है क्या
अनार के जूस में घुलनशील पॉलिफेनॉल, टेनीन एवं एंथोसायनीन जैसे अतिशक्तिशाली एंटी आक्सिडेंट पाये जाते हैं, जो शरीर में उत्पन्न जहरों को शरीर के बाहर निकाल देते हैं। अभी हाल में पता चला है कि अनार में इलागीटानीन नामक एक एंटी आक्सिडेंट होता है, जो शरीर में मेटाबोलिज्म के बाद यूरोलीथीन में परिवर्तित हो जाता है। यह यूरोलीथीन प्रोस्टेट ग्रंथि में जाकर प्रोस्टेट कैंसर कोशिकाओं के ग्रोथ को रोकने में सक्षम हैं।

प्रोस्टेट कैंसर में कारगर
नवीनतम शोधों ने एक महत्वपूर्ण खोज की है। कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी में हुए एक सोध में दिखाया गया है कि अनार के जूस में पाये जाने वाले इलागीटानीन के प्रभाव से शरीर में प्रोस्टेट कैंसर को फैलने से रोका जा सकता है। यह किमोथेरापी एवं रेडियेशन थेरापी की असफलता के बाद भी कैंसर कोशिकाओं की बढ़त को रोक देता है। अनार का जूस लगातार पीने वालों में प्रोस्टेट कैंसर होने की संभावना काफी कम जाती है। फेफड़े के कैंसर की बढ़त रोकने में अनार के जूस को सक्षम पाया गया है। ब्रेस्ट कैंसर, कोलोन कैंसर एवं स्कीन कैंसर के इलाज में भी इसे प्रभावशाली पाया गया है।

डायबिटीज में असरदार
इस्राइल में हुए शोधों के अनुसार डायबिटीज में भी अनार का एक ग्लास जूस अवश्य लेना चाहिए। इसमें शुगर की मात्रा काफी होती है, मगर पाया गया है कि यह शुगर एंटी आक्सिडेंटों के साथ चिपका रहता है। इसलिए रक्त में शुगर की मात्रा नहीं बढ़ती। डायबिटीज में होनेवाले तमाम खतरनाक दुष्परिणामों को रोकने में अनार प्रभावशाली ढंग से सक्षम है। कुछ शोधकर्ता तो अनार को डायबिटीज के नेचुरल क्योर की तरह आंक रहे हैं। उनका कहना है कि जिन जहरों के कारण डायबिटीज की शुरुआत होती है और आंख, किडनी, हार्ट, ब्रेन जैसे अंगों की खराबी होती है, उस पर अनार में पाये जाने एंटी आक्सिडेंटों द्वारा कुठाराघात किया जा सकता है।

गुणों का खजाना
अनार के वृक्ष की पत्तियों का एक्सट्रैक्ट लेने से भूख कम लगती है और मोटापे के इलाज में मदद मिलती है। नपुंसकता की समस्या में भी एक शोध ने अनार के जूस को प्रभावशाली पाया है। गर्भवती स्त्रियों को अनार का जूस लेने से नवजात शिशुओं को ब्रेन डैमेज होने का खतरा कम जाता है। ओस्टियो अर्थराइटिस एवं अन्य प्रकार के ज्वाइंट डिजीज में भी इसका चमत्कार देखा जा सकता है। अलजाइमर रोग से बचाव में भी इसकी महत्वपूर्ण भूमिका है। यह रक्तचाप को कम करता है, दांतों को स्वस्थ रकता है एवं तमाम जीर्ण रोगों में फायदा पहुचाता है। ऐसा होने का मुख्य कारण अनार में पाया जाने वाला हाइ क्वालिटी का हाइ एंटी आक्सिडेंट कंटेंट है। रेड वाइन, ब्ल्यू बेरी जूस एवं ग्रीन चाय से भी ज्यादा एंटी आक्सिडेंट इसमें है। दुनिया की सभी पुरातन सभ्यताओं ने अनार के गुणों का खूब वर्णन किया है। अब आधुनिक मेडिकल साइंस उन्ही गुणों को स्थापित कर रहा है।