माइक्रोअल्बुमिनुरिया



क्या है माइक्रोअल्बुमिनुरिया?

-'माइक्रल टेस्ट' एक स्क्रीनींग टेस्ट है, इसे करना बहुत सरल है।

-'रिएजेंट स्ट्रीप' माइक्रल टेस्ट द्वारा इसे सधारणतः किया जाता है। पेशाब में अल्बुमीन(प्रोटीन) की कितनी मात्रा निकल रही है, यही इसमें देखा जाता है।

-24 घंटे में सामान्य आदमी में 30 मि.ग्रा. से कम अल्बुमीन पेशाब में निकलता है। यदि आपके पेशाब में 24 घंटे में 30 मि.ग्रा. से ज्यादा अल्बुमीन जा रहा है तो माइक्रल टेस्ट पॉजीटीव आता है। स्ट्रीप टेस्ट से यदि पॉजीटिव रिजल्ट आता है तो इसे अन्य स्पेशिफिक जाँच द्वारा निश्चित करना जरुरी है।

-यदि आपको माइक्रोअल्बुमिनुरिया की अवस्था शुरु हो गयी है तो तुरंत सावधानी की जरुरत है। इस समय से भी यदि इन उपायों का आप अनुसरण करें तो किडनी फेल्यर से बचने की काफी संभावना रहती है।

  • शुरुआती दौर से ब्लड-सुगर का कठोर नियंत्रण करें। यह सही खान-पान उपयुक्त व्यायाम, दवाइयाँ एवं इन्सुलीन के उचित प्रयोग द्वारा संभव है।
  • अपना वजन घटाएं।
  • नमक कम खाएं।
  • नियमित व्यायाम करें।
  • शराब न पीये और धुम्रपान न करें।
  • चिकित्सक के परामर्श के बाद एस -इन्हीबीटर ग्रुप की दवा का नियमित प्रयोग करे।
  • हर हाल में अपना रक्त-चाप 120 से 80 के नीचे रखें। उच्च रक्तचाप का रहना मधुमेह के मरीजों में किडनी फेल्यर का महत्वपूर्ण कारण है।

-छह माह में तीन बार किये गए पेशाब की जाँच में यदि दो बार माइक्रोअल्बुमिनुरिया मिले तभी यह निश्चित होता है कि यह पैथोलाजिकल है। केवल एक बार स्कारात्मक हो तो यह समान्य कारणों से भी हो सकता है।

-माइक्रोअल्बुमिनुरिया का पता होते ही खास उपायों के द्वारा इस अवस्था को रोका जा सकता है। इस टेस्ट के साकारात्मक होने का मतलब है कि आपको भविष्य में किडनी की खराबी की संभावना है।