दिल बेचैन है



दिल बेचैन है, रस्ते पर नैन है

अंदर ही अंदर घुटन हो, तबाही हो, बाहर् कुछ पता न चले, मगर यह खतरनाक बात है

दिल में दर्द का उठना अच्छी बात है। इससे आसपास के लोगों को मालुम होता है कि फ्लां को दिल में दर्द उठ रहा है। मेडिकल कालेज में फाइनल वर्ष में मेरे एक दोस्त को दिल में दर्द था। साधु किस्म का आदमी बेचार जिसने भरी जवानी में अब तक केवल एक ही फिल्म देखी थी - उस समय की सुपर हिट 'जय संतोषी माँ'। एक दिन फर्स्ट इयर की मधुबाला जैसी एक लड़की से उसकी आँख लड़ गयी। बेकाबू बरसात में अषाढ़ का एक दिन मानों खुशबुओं का एक झोंका लेकर आया। अभिव्यक्ति उजागर हुई, उसने एक कविता लिखी -'पहले मुझे पत्थरों और पहाड़ों से प्यार था, अब तुमसे हो गया है।

मेरा एक दोस्त और था , नाम था 'सरदार'। बेचारा आशिकी में नाकाम होकर गमनीन रहता था। उसने भी वह कविता पढ़ी। रियेक्शन में तब उसनें उसने एक कविता लिखी -'पहले मुझे तुमसे प्यार था, अब पत्थरों और पहाड़ों से हो गया है। जिदंगी चलती रही। समस्या वहाँ होती है जहाँ पीड़ा की अभिव्यक्ति नहीं हो पाती। अंदर ही अंदर घुटन हो, तबाही हो, बाहर् कुछ पता न चले, मगर यह खतरनाक बात है।


25% में यह हो जाता है - बिना पीड़ा के, बिना दर्द के हार्ट-अटैक

ऐसी ही समस्या है, डायबिटीज के मरिजों में हार्ट-अटैक का होना । 25% में यह हो जाता है - बिना पीड़ा के, बिना दर्द के। सामान्यतः हार्ट-अटैक छाती में भयानक दर्द के साथ होता है। साथ ही खुब पसीना आता है। दर्द के कारण ही लोगों को पता चल जाता है कि मरीज को इलाज की जरुरत है।डायबिटीज के कुछ मरीजों में नसों की खराबी हो जाती है। ऑटोनोमिक न्यूरोपैथी के कारण हार्ट-अटैक हो तो दर्द नहीं भी हो सकता है। अचानक सांस का फूलना, चक्कर आना, रक्तचाप का कम हो जाना, बैचैनी का होना आदि जैसे लक्षण हार्ट-अटैक के हो सकते हैं। ऐसे मरीजों को पकड़ पाना कठीन होता है।


मोहब्बत कीजिएगा तो दिल से डर निकल जाएगा

जनरल ऑफ अमेरीकन मेडिकल एशोसियेशन में अभी हाल मे हार्ट एटेक से पीड़ित लोगों का अध्ययन छपा है करीब 434877 हार्ट एटेक से पीड़ित लोगों में 32 प्रतिशत को बिना छाती में दर्द हुए ही हार्ट एटेक हो गया था । महत्वपूर्ण बात यह आयी कि जिन लोगों में दर्द के साथ हार्ट एटेक हुआ था उसमें केवल 9 प्रतिशत लोगों की मौत हुई जबकि बिना दर्द वाले समूह में 23 प्रतिशत लोगों की मौत हुई। । मतलब यह हुआ कि बिना दर्द के हार्ट एटेक ज्यादा खतरनाक होता है । इसलिए डायबिटीज के मरीजों में असाधारण लक्षणों पर विशेष सतर्कता की जरूरत है । डायबिटीज और ह्रदय का बङा गहरा रिश्ता है। साधारण लोगों की अपेक्षा डायबिटीज के मरीजों में हार्ट एटेक मर्दों में 50 गुणा ज्यादा होने की संभावना रहती है । औरतों में तो एक सौ पचास गुणा । 45 साल की अवस्था के बाद औरतों में हार्ट एटेक ज्यादा खतरनाक होता है ।डायबिटीज के पुरूष मरीजों में बिना किसी विशेष कारण के अचानक मृत्यु सामान्य लोगों की अपेक्षा 50 गुणा ज्यादा होने की संभावना रहती है और महिलाओं में 300 सौ गुणा ज्यादा । इन आँकङों से डाय बिटीज के मरीजों को डर जरूर होगा । मगर क्या किया जाये, सच्चाई तो सच्चाई है । मुगले आजम पिक्चर में एक डायलॉग था । सुरैया ने कहा था मोहब्बत कीजिएगा तो दिल से डर निकल जाएगा । मैं आपको डायबिटीज से उत्पन्न हार्ट एटेक संबंधित डर से निजात पाने के लिए मोहब्बत करने की सलाह तो नहीं दूँगा मगर कुछ जरूरी बातों को जानिएगा तो हार्ट एटेक का डर दिल से अवश्य निकल जाएगा ।

आप चाहें तो हार्ट एटेक से बच सकते हैं । हार्ट एटेक हो भी जाए तो तुरंत इलाज करा कर जीवन बचा सकते हैं । पहली बात है डायबिटीज का पूरा नियंत्रण करना । ब्लड सुगर को 140 मिग्रा के नीचे रखना-सही भोजन, व्यायाम, दवाइयों या इंसुलीन द्वारा ऐसा करना कोई मुश्किल काम नहीं ।

 


देरी न करें तुरंत अस्पताल पहुँचें

ब्लड प्रेशर बढा है तो रोज दवा खायें । ध्रुमपान तो करना ही नहीं है । चमत्कारी दवा एसपीरीन जो रक्त में थक्का बनने नहीं देती, उसे रोज खाना चाहिए (75 से 150 मिग्रा)। ब्लड में कोलेस्टोरेल, टीजी, एलडीएल कोलस्टोरोल (लिपिड प्रोफाइल) की जांच कर पता कर लें कि कहीं मात्रा बढ तो नहीं गई है । जरूरत के अनुसार नयी चमत्कारी दवाएं स्टेटीन ग्रपु के सेवन से कोलेस्टोरेल के जमाव को बहुत हद तक कम किया जा सकता है। साधारण लक्षण जैसे अचानक सांस का फूलना, बेचैनी, बेहोशी, रक्तचाप का गिर जाना एवं अत्याधिक थकान का होना हार्ट ऐटेक के लक्षण हो सकते हैं । देरी न करें तुरंत अस्पताल पहुँचें, समय पर थक्के को गलाने वाली दवा स्ट्रेपटोकाइनेज देकर आपको बचाया जा सकता है, जानकारी रखिए ।


पलाशों की दृढता और अभिव्यक्ति को अपना गाइड़ बनाइए

अभिव्यक्ति सजग कीजिए । जिदंगी का सफर अनजान है एवं अरूप भी । धुंध से आएं है, धुंध में जाना है । जबतक दिल है दर्द होगा । दर्द को गीत में बदलिए, क्योकि जीना तो है ही । पलाशों में फूल रोज नहीं खिलते हैं। फूलों की प्रत्याशा में पलाशों को खुसी-खुशी जीते देखा है । पलाशों की दृढता और अभिव्यक्ति को अपना गाइड़ बनाइए ।