मधुमेह में हॄदय



मधुमेह में हॄदय तीन तरह से मुश्किलों में फंसता है।

1. एथरोस्कलेरोटिक कोरोनरी हॄदय रोग

2. ऑटोनामिक न्यूरोपैथी जनित समस्याएँ

3. कॉर्डियोमायोपैथी का हो जाना

यह जानना आवश्यक है कि मधुमेह के रोगीयों में हॄदय रोग होने की सम्भावना बढ़ जाती है। साधारण जनो में हॄदयाघात या इसचिमिक हॄदय रोग की सम्भावना 2 से 4% होती है जबकि मधुमेह के रोगियों में 55%।

आथरोस्केलोरोटीक पैथोलॉजी से हृदयआघात बढ़ जाता है। आटोनामिक न्यूरोपैथी होने के कारण अचानक मृत्यु का होना, हृदय की गति का बढा रहना, सोने के बाद तुरंत उठने से रक्तचाप का गिर जाना, हृदयआघात होने पर दर्द का न होना, जैसी समस्याएं होती हैं। कारडियोमायोपैथी होने से हृदय फूल जाता है और हार्ट फेल्यर की समस्या पैदा होती है।

मधुमेह के रोगियों में इसचिमिक हॄदय रोग होने की संभावना सामान्य लोगों से कई गुणा बढ़ जाती है।

रोग

मधुमेह रोगियों में बढ़ोतरी

पुरुष

महिलाएँ

एनजाइना

60%

90%

हॄदय आघात

50%

150%

अचानक मॄत्यु

50%

300%


 

 

 

 



मधुमेह नियन्त्रित कर इसे रोका जा सकता है।


बचाव कैसे करें

1. मधुमेह का सही नियंत्रण दुष्परिणामों से बचाता है।
2. समय-समय पर ई.सी.जी, एक्स रे, इकोकारडियोग्राफी, टी.एम.टी, होल्टर मॉनिटॉरिंग जैसी जांचो को चिकित्सक की सलाह से कराएं। जरुरत रहने पर एनजियोग्राफी कराएँ।
3. धुम्रपान न करें। रोज व्यायाम करें। सही खाद्य तेलों का व्यवहार करें।


हृदयाआघात के बारे में पूरा जानिए।इसे जानना हर डायबिटीज के मरीज को जरूरी है

छुट्टियों के दिन थे। साल 1955 का। राष्ट्रपति आइसेन आवर ने एक रात असहनीय वेदना में तड़प-तड़प का गुजारा। छाती के मध्य में उठा दर्द हृदय आघात के कारण था। दिन गुजरे और वे पूर्ण स्वस्थ होकर पुनः दुसरी बार चुने गये। फुटबाल प्रशिक्षक सेननेकर को हृदय आघात चालीस साल की उम्र में हुआ। बाईपास शल्य क्रिया सैतालीस की उम्र में हुई। इसके बाद दस साल तक उन्होंने विशिष्ट ढंग से प्रशिक्षक का कार्य किया। प्रधानमंत्री चर्चिल को चार साल में चार बार हदय आघात हुआ। इसके बाद उन्होंने सत्ता का पूर्ण संचालन किया। अंतरिक्ष यात्री जेम्स इनविन, निर्देशक अल्फ्रेड आदि अनेक लोगों ने बीमारी के बाद अपने कार्य का संपादन कुशलता से किया।

अब देखिए दूसरी स्थिति - मेरे निकट के एक महोदय को छाती में एक दिन दर्द हुआ। ई.सी.जी. में मामूली गड़बड़ी निकली। इसका डर इतना समा गया उनके मन में कि छह महीने तक अपनी ड्यूटी नहीं कर सके। अकेले बाजार नहीं जा सके। अकेले सफर नहीं कर सके। घर में भी आराम से नही जी सके। पत्नी, बच्चों सबका जीना दूभर कर दिया। दिन रात मन में एक ही विचार कि मै हृदय का रोगी हूं। मैं कुछ नहीं कर सकता। एक प्रसिद्ध चिकित्सक ने कहा है कि एक बार हृदय आघात होने के बाद प्रमुख समस्या हृदय में नहीं मस्तिष्क में रहती है। यदि चिकित्सक ने एक बार किसी को हृदय रोगी परिभाषित किया तो उसकी जिन्दगी की खुशी खत्म हो जाती है। क्या इतने डर की कोई बात है?


चिकित्सा का कमाल

सच तो यह है कि इस बीमारी के इलाज में अदभुत सफलता आज उपलब्ध है जिसकी दस साल पहले किसी के कल्पना भी न की होगी। पहले हृदय आघात होने का मतलब था, बीमार को कई- कई महीने बिस्तर पर रखना तथा चुपचाप देखते रहना। उन्मुक्त और भागदौड़ की जिन्दगी नहीं जीने देना। उसको असमर्थ और लाचारों की कतार में रख देना। आज स्थिति यह नहीं है। यह कहानी नहीं बल्कि सच है कि सिंगापुर में एक यात्री को हृदय आघात हुआ। उसके साथ यात्रा पर निकले साथियों ने चिकित्सक से पूछा अब क्या होगा? चिकित्सक ने कहा आप अपनी यात्रा जारी रखें। एक हफ्ते के बाद आपका साथी आपको आगे की यात्रा पर होगा। उन्होंने उस व्यक्ति का एनजियोग्राम किया। हृदय की मांसपेशी के जिस भाग में खून का संचालन बंद था उसका कारण पता लगाया गया। बैलून एनजियोप्लास्टी से खून की नली में फैलाव लाया गया। पुनः खून का संचालन शुरू करके मांसपेशी को मुर्दा होने से बचा लिया गया। विज्ञान की इस सफलता को ठुकराया नहीं जा सकता है।

सड़क पर मरणासन्न रोगी को सही चिकित्सा से आज बचाया जा सकता है। स्ट्रेपपटोकाइनेज और टीपीए जैसी दवाइयां अस्पताल के बाहर इस्तेमाल की जा रही हैं, जिसके प्रभाव से हृदय को पूर्ववत बनाये रखा जा सकता है। आज की चिकित्सा हृदय आघात के रोगयों को दो तीन दिनों के बाद ही नियमित क्रमबद्ध व्यायाम के द्वरा नये आयाम उपस्थित करती है।

इसे शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इसके अलावे कोरोनरी केयर इकाइयों ने रोग से होने वाली मृत्यु दर को काफी कम किया है। आज पांच में से चार लोग अपने कार्य पर चिकित्सा के बाद लौटने में समर्थ हो पाते हैं।


हमारे देश में तो उल्टी गंगा

दुनिया भर में जब हृदय आघात का दर कमने लगा तब हमारे देश में उल्टा हुआ। ज्यादा लोग हृदय आघात से पीड़ीत होने लगे और खास कर 30 से 45 साल के लोग। इस तथ्य को समझना आज हमारी उच्च कोटि की प्राथमिकता होनी चाहिए। गली गली में कोरोनरी केयर ईकाई खोल दीजिए, इससे कुछ मिलने वाला नही है। प्लेग से भी भयानक 21 वीं शताब्दी की इस आधुनिक विपदा को दर को कम होने की प्रक्रिया डाक्टरों ने नहीं की, नर्सो ने नही की, बल्कि पश्चिमी देशों के सामान्य लोगों ने की।


ऐसे आश्चर्यजनक मशीन के लिए हम क्या करते है?

विज्ञान की नई किरणों ने रोजमर्रे की जिन्दगी में समायी आदतों को परखा। धुम्रपान, सही भोजन और नियमित व्यायाम - इन पर निर्भर करेगा आपके हृदय का स्वास्थ्य। वह हृदय जो बंद मुट्ठी जितना बड़ा है, जिसका वजन 11 आंस से ज्यादा नहीं है, जो दिन में 1,00,000 बार धड़कता है, जो शरीर में फैली करीब 60,000 मील लम्बी रक्त वाहिनियों में रक्त प्रवाहित करता है, जो दिन भर 2500 से 5000 गैलन तक पम्प करता है, ऐसे आश्चर्यजनक मशीन के लिए हम क्या करते है? 30 हाजर के स्कूटर की सर्विसिंग हम कितने मनोयोग से कराते हैं, किन्तु जिन सही प्रणालियों की हमारी हृदय को जरूरत है, उससे दिन ब दिन हमारा समाज दूर होता जा रहा है।
बड़े-बड़े हार्ट सेन्टर खुल रहे हैं। नई-नई मशीनें ईजाद ही रही हैं, करोंड़ो रुपया अनुसंधान में लगा हुआ है, लेकिन जीवन के मूलभूत सिद्धांत भूले जा चुके हैं। हम बचाव की नीति नहीं अपना रहे, रोग को होने दो, ईलाज पर ध्यान दो। मगर रोग ही न हो इस पर हम मौन हैं। बाहर के देशों में आशा की किरण दिखी, उन्होंने हृदय बचाव जीवन प्रणाली विकसित की। और उन्हें यह पता चला बहुत खर्चीले रिसर्च के बाद। इस रिसर्च ने छह नियम बताए। आप हंसेंगे जानकर ये नियम। भला ये भी क्या नियम हुए इन्हें तो दादी अम्मा भी जानती थीं। मगर चूंकि ये नियम बाहर के देशों ने बताए और अपनाने की कोशिश कर रहे हैं, अब हमें भी आकर्षित कर रहे हैं।


क्यों होता है हृदय आघात

हृदय की मांसपेशियों को कोरोनरी आरटरी द्वारा रक्त पहुंचता है। मगर कोरोनरी आरटरी में कोलेस्टरोल जमने लगे तो आरटरी संकरी हो जायेगी। इस प्रक्रिया को एथरोस्कलोरेसिस कहते है। आरटरी के अंदर एकरोस्केलोरोटिक प्लेक पर यदि असामान्य रुप से प्लेक जम कर थक्का बना दें, प्लेक फट जाए या वहां रक्त स्राव हो जाये तो कोरोनरी आरटरी में रक्त प्रवाह की रुकावट होगी। जैसे ही आरटरी बंद होता है हृदय के उस भाग को रक्त का मिलना बंद हो जाता है, जो क्षेत्र उस खास आरटरी के द्वारा संचालित होता है। वह भाग अंततः नेकरोसिस की प्रक्रिया से गुजरने लगता है, यानि मरणशील हो जाता है। मांसपेशियों का इस तरह मरणशील होना ही हृदय आघात है।


आगमन की सूचना

एक चालीस साल का व्यक्ति सुबह उठने के बाद चाय पी रहा था। अचानक छाती के मध्य भाग में बहुत तेज दर्द उठा, दर्द असहनीय था। छाती से उठा हुआ वह दर्द बायें हाथ तक फैल रहा था। दर्द रह रह कर आधे घंटे तक होता रहा। देखने में रोगी काफी भयभीत नजर आ रहा था, पूरे शरीर से काफी पसीना छूटने लगा। उसे चक्कर भी आ रहा था। ई.सी.जी. करने पर पता चला उस गंभीर रुप से हृदय आघात हो गया था।

बिना किसी दर्द के भी हृदय आघात हो सकता है-खासकर डायबिटीज के रोगियों में

एक पचास साल की महिला को मधुमेह था। एक सुबह अचानक चक्कर खाकर गिर पड़ी और बेहोश हो गयी। उसे अस्पताल पहुचाया गया। छाती में दर्द की कोई हिस्ट्री नहीं थी। ई.सी.जी के बाद हृदय आघात पाया गया। 10 से 25 प्रतिशत रोगियों में बिना किसी दर्द के भी हृदय आघात हो सकता है-खासकर डायबिटीज के रोगियों में।

हृदय आघात के लक्षण कभी-कभी असाधारण भी हो सकते हैं

एक साठ साल के व्यक्ति की सांस अचानक फूलने लगी। उसका हृदय पूरी तरह काम नहीं करने से फेल्यर की अवस्था में था। उसे भी हृदय आघात हो गया था। हृदय आघात के लक्षण कभी-कभी असाधारण भी हो सकते हैं। एक महिला को पेट में अचानक भयानक दर्द शुरू हुआ। पूरी जांच के बाद मालुम हुआ कि उसे हृदय आघात हो गया था। एक महाशय ने बताया कि उन्हें गले के अंदर कुछ फंसने जैसा लग रहा है, बाद में पता चला उन्हें हृदय आघात हो गया था।
इस तरह कितने ही तरह से हृदय आघात अपने आगमन की सूचना देता है। यह अति आवश्यक है कि हृदय आघात को तुरंत पहचाना जाए और शीघ्र चिकित्सक की देख रेख में रहा जाए। जितनी जल्दी सही चिकित्सा शुरु होगी, जीवन रक्षा की संभावना उतनी रहेगी। एक चौथाई रोगियों की मौत बिना किसी चिकित्सा के ही हो जाती है, क्योंकि सहायता के पहले ही सबकुछ खतम हो जाता है। हृदय आघात से जितनी मौतें होती हैं उसका 50 प्रतिशत दो घंटे के अंदर मर जाते हैं और 75 प्रतिशत चौबीस घटे के अंदर। शुरू के दो घंटे बहुत महत्वपूर्ण हैं। अगर आप ऐसे किसी व्यक्ति के साथ हों जिसे हृदय आघात होने जैसा लगे तो ज्यादा कुछ सोचन के बजाय तुरंत अस्पताल की ओर प्रयाण करें। यह सोच कर दिलासा न दें कि इनडाइजेशन या गैस से यह सब हो रहा है।


हृदयाघात-बचावजीवन प्रणाली

कई मिलयन डालर खर्च करके रिसर्च से यह पता चला कि हृदय को स्वस्थ रखना है तो यह छह नियम अपनाने होगे -

1. सिगरेट पीना बंद करें, 2. वैसा भोजन करें जिसमें चर्बी कम हो, नमक कम खाएं 3.नियमित व्यायाम करें, 4. अगर शराब पीते हों तो एक पैग से ज्यादा न पीएं, 5. वजन ज्यादा हो तो कम करें, 6. ध्यान, योगासन आदि के द्वारा रिलैक्स होना सीखें।

1. सुबह के भूले को भी पूरा फायदा
धुम्रपान आधुनिकता की निशानी, व्यस्तता की झलक और मादकता से भरा अहसास हो सकता है किन्तु हृदय आघात के लिए महत्वपूर्ण रिस्क फैक्टर है - जिसे चाहें तो छोड़ा जा सकता है। धुएं के साथ फेफड़ें में गयी निकोटीन रक्त वाहिनियो में खून के प्रवाह में प्रतिरोध पैदा करती है और हृदय गति तेज करती है। यह लीवर के काम में बाधा डालकर खून के अंदर चर्बी युक्त पदार्थो को हटने नही देती जिससे थक्के बनने की आशंका बढ़ जाती है। जैसे ही आप धुम्रपान बंद करते हैं, शरीर अपने को ठीक करने लगता है। शरीर पूर्व स्थिति में आने लगता है। करीब दो हफ्ते में आर. बी. सी. से कार्बन मनोडायक्साइड का असर खत्म हो जाता है। दो साल के बाद हृदय आघात होने का रिस्क आधा हो जाताहै। 10 साल से 15 साल के बाद यह रिस्क कभी भी धुम्रपान न करने वालों को बराबर हो जाता है।

2. गीता में कृष्णा ने अर्जुन को सात्विक भोजन की सलाह दी थी, विज्ञान भी आज भी कह रहा है.
जिन खाद्य पदार्थो को ललचाई निगाह से देखा करते थे, जिनको खाकर अमीरी का अहसास होता था, आज उन्हें खतरनाक भोज्य पदार्थो में गिना जाता है। और यह शुभ घड़ी है। हम खा रहे हैं उन चीजों को जरूर, लेकिन पता है कि उनको खाना नहीं चाहिए। चर्बी युक्त चीजें जो मांसाहार से मिलती है - सैचुरेटेड फैट कहलाती है। इसके खाने से कोलेस्टरोल अधिक मात्रा में रक्तवाहिनियों के अन्दर जमा हो जाता है।मोनोसेचुरेटेड चर्बी शरीर के कोलेस्टोरोल में कोई परिवर्तन नहीं करती। शाकाहारी चीजों में यह सब मिलता है जसे कार्न आयल, सोयाबीन आयल आदि।डा. कीज ने अपने सात देशों में किए गये सर्वक्षण में पाया कि जापान के लोगों में हृदय आघात सबसे कम होता है और वे सबसे कम सेचुरेटेड चर्बी खाते हैं। अब मचा देखिए कि जो जापानी अमेरीका में जा बसे और अपने खाने की आदतों को बदल लिया उनमें हृदय आघात उनके अपने देश के लोगों की अपेक्षा दस गुना ज्यादा हुआ। इस सर्वेक्षण से हमारी आंखें खुल जानी चाहिए।

3. नमक कम खाइए

नमक में रसायनिक तौर पर 40 प्रतिशत सोडियम है, सोडियम शरीर में ज्यादा हो तो शरीर में ज्यादा पानी जमा होता है, जिससे खून का आयतन बढ़ जाता है और अंततः इससे रक्तचाप उच्च हो जाता है। बढ़ा हुआ रक्तचाप हृदय आघात, स्ट्रोक आदि के लिए मूल खतरा माना जाता है। नमक हम रोज 10 से 15 ग्राम खातें हैं, रोज 3 से 5 ग्राम तक खायें तो अपने शरीर पर उपकार करेंगे।

4. अपने शरीर पर उपकार करिए

ब्रिटेन, इटली इजारायल और अमेरिका में हुए अनुसंधान के अनुसार शारीरिक काम करने वाले लोगों को हृदय आघात होने का खतरा कम रहता है और दोस्त कोलेस्ट्रोरोल -एच.डी. एल. की मात्रा शरीर में बढ़ती है।थक्के बनने की संभावना कमती है। हृदय अपना काम और अच्छी तरह कर पाता है। एइरोबिक व्यायाम को उत्तम माना गया है। तेजी से टहलना, जोगिंग,साइकिल की सवारी, तैरना आदि से एइरोबिक व्यायाम होजाता है।

5. अल्कोहल की महिमा
अल्कोहल शरीर के अन्य अंगों के अलावा हृदय पर भी बुरा असर डालता है। बहुत ज्यादा सेवन से अलकोहोलिक कारडियोमायोपैथी की बीमारी हो सकती है। हृदय की गति बिगड़ने से अचानक मृत्यु भी हो सकती है। किन्तु अगर एक पैग रोज लिया जाए तो इसे हृदय के लिए अच्छा माना गया है। हृदय की कोरोनरी आरटरी में यह फैलाव कर रक्त का प्रवाह अच्छा करता है। पीने वालों के लिए यह अच्छा समाचार हो सकती है।, किन्तु 30 मि. ली. से ज्यादा पीने की सलाह नहीं दी जा सकती। लिखने का यह उद्देश्य नहीं है कि आप 30 मि.ली. पीना शुरु ही कर दें। इस मात्रा में भी पेट पर खराब असर पड़ सकता है।

6. इट लेस,वाक मोर..
फ्रैमिघम अध्ययन ने पाया कि बढ़े हुए वजन से एनजाइना होने का खतरा बढ़ जाता है। मोटे लोगों में हृदय आघात होने पर अचानक मृत्यु की संभावना बढ़ जाती है। वजन कम करने का एक ही रास्ता है-खाइए कम कैलोरी और व्यायाम कीजिए ज्यादा।


7.तनाव जिन्दगी की चुनौती है

रोजमर्रा के कार्यों का संपादन आप कैसे करते हैं हंसते हुए या रोते हुए सही ढंग से कार्य करें तो तनाव कम हो सकते हैं। बहुत मुश्किल है बफिक्री में जीना। थोडा दृष्टिकोण बदलें, थोड़ा आध्यात्मिक चिन्तन करे और योग की तकनीक अपनाए। ध्यान, आसन, प्राणायाम को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।


हृदय-बचाव जीवन प्रणाली सही मायने में जीवन को नया आयाम देती है।

सच पूछिए तो तो भारतीय जीवन प्रणाली बहुत पहले से यह संदेश दे रही है। आधुनिकता के चकाचौंध में हर चीज हम उधार में ले रहे हैं। मगर सच जो कल था आज भी वहीं है। मूल समस्या उनको अपनाने की है।


वास्तिवक रुप से हम क्या कर सकते हैं?

-धुम्रपान धीरे-धीरे बंद किया जा सकता है.

-डालडा, घी आदि के जगह पर सरसों तेल या सोयाबीन के तेल का ही व्यवहार करें।

-बड़े जानवरों के चर्बी युक्त मांस की जगह चिकेन जिसमें कम चर्बी होती है, खायी जा सकती है।

-एक या दो अण्डे खाने में कोई हर्ज नहीं है।

-ज्यादा नमकीन चीजें आसानी से चोड़ी जा सकती है।

-व्यायाम के नाम पर कुछ नहीं तो तेजी से टहला जा सकता है। समय-समय पर रक्तचाप की जांच करवायी जा सकती है और शराब कभी कभी एक पैग पी जा सकती है।

-तनाव मुक्ति के कई साधन अपनाए जा सकते हैं।


हृदय-आघात के बाद

हृदय आघात के रोगियों को बीमारी के बाद धीरे-धीरे सामान्य जीवन की ओर सावधानी से जाना चाहिए। प्रायः कुछ दवाइयां दी जाती है। एसपीरीन का महत्व दिन-ब-दिन बड़ता जा रहा है. अब कहते हैं कि हफ्ते में दो दिन भी एसपीरीन खा ली जाए तो खून में थक्के बनने की संभावना कम हो जाती है। पहले हृदय आघात के रोगियों को बिस्तर पर से हिलना डुलना मना था। आजकल बेड साइड फिजियोथेरापी जल्द ही शुरु कर दी जा है। अगर कोई असाधारण अवस्था नही हो तो रोगी एक दो दिन के अंदर ही कुर्सी पर बैठ सकता है। एक हफ्ते के अंदर चल फिर सकता है। सात से दस दिनों के अंदर घर जा सकता है और सामान्यतया अपने कार्य को छह हफ्ते बाद कर सकता है। कोरोनरी केयर इकाई से घर तक के सफर में जिन्दगी में बहुत कुछ बदल जाता है। अपने को हृदय आघात से गुजरा पाकर मानसिक तौर से रोगी भय से घिरा रहता है। यह डर पुनः आघात के होने की संभावना को लेकर, उन्मुक्त जीवन की उछाल में थिरक पायेंगे की नहीं, यह सोच कर बना रहता है।

वैसे इस तरह के डर की कोई जरुरत ही नहीं है। सोच लें कि बस एक दुःस्वपन आया और चला गया। किन्तु इस अवस्था को आप सही धरातल दें, इसके लिए बीमारी के बाद चिकित्सकों की सलाह के अनुसार चलें। जो दवाईयां जरुरी है उन्हें बिना किसी भलचूक के नियिमत खाएं।

भोजन, व्यायाम, धुम्रपान, तनाव, रक्तचाप पर नियंत्रण यह सब फिर से नये मायने में उभरेंगे. आपके चिकित्सक का आपको सामान्य धरातल पर लाने का योगदान अपेक्षित हैं। आपको यह अहसास दिलाना कि हृदय आघात के बाद भी आप एक बिल्कुल स्वस्थ्य और जीवन की गरिमा से आप्लावित व्यक्तित्व हैं, जरुरी है। आप एक सीमित और बदले परिवेश में सब कुछ कर सकते हैं।


अंततः यह कि -- जोक ही है

हृदय आघात से पीड़ीत एक मरीज ने चिकित्सक से पूछा-डाक्टर साहेब, क्या स्वस्थ होने के बाद मैं सेक्स पहले की तरह कर सकता हूं।
डाक्टर ने कहा-हां, मगर केवल अपनी पत्नी के साथ,

मरीज ने पूछा-इसका मतलब?

डाक्टर ने कहा क्योंकि तब आपको उत्तेजना नहीं होगी.......