मानसिक तनाव से बचिए



डायबिटीज का बहुत कुछ लेना-देना है मानसिक तनाव से

मानसिक तनाव हॄदय आघात के लिए आजकल सबसे महत्वपूर्ण रिस्क फैक्टर जाना जा रहा है। उच्च रक्त चाप, मधुमेह, धुम्र्पान, अलकोहल आदि से भी खतरनाक है - तनाव ग्रसित जीवन प्रणाली। यह तथ्य आधुनिक खोजों से उजागर हुआ है। इस जानकारी से हम कैसे लाभान्वित हों, इसका विवेचन आज के परिप्रेक्ष्य में जरुरी है। सकारात्मक विचार से हम घिरे रहें और नकारात्मक सोच् दूर हो - ऐसी प्रणाली को समझना और अपनाना हॄदय आघात से बचाव की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम होगा।


हमारी विचार धारा आम घटनाएं नहीं है

हम जो सोचते है, हमारी जो विचार धारा है, हमारे जो भावनात्मक उद्दगार हैं, मास्तिष्क में उठते मंडराते अतीत और भविष्य के जो स्मॄति चिन्ह हैं, हमारी जो कल्पनाएं हैं ये मात्र क्षणिक आम घटनाएं नहीं है बल्कि इनका इल्क्ट्रो मेडिकल प्रभाव शारीरिक क्रियाओं पर दूरगामी है।


हमारे सकारात्मक और नकारात्मक विचार विभिन्न रसायनों को उत्पन्न कराते हैं

अति जटिल आधुनिक यंत्र पाजिट्रान टोमोग्राफी स्केनिंग की सहायता से मस्तिष्क में घट रही इन प्रक्रियाओं को देखा और परखा जा सकता है। शरीर की कोशिकाओं पर हमारी मानसिक स्थिति का प्रभाव इलेक्ट्रोमेडिकल घटना के तहत कुछ विशिष्ट रसायनों की सहायता से होता है । हमारे सकारात्मक और नकारात्मक विचार विभिन्न रसायनों को उत्पन्न कराते हैं । जिनका प्रभाव शरीर पर अलग-अलग होता है । ऐसे संदेश वाहक रसायनों को न्यूरोपेपटाइड कहते हैं । मस्तिष्क के हाइपोथलामस में ये स्रावित होते हैं और शरीर के विभिन्न अंगो तक पहुँच जाते हैं ।

इस तरह मस्तिष्क में उठी एक विशिष्ट विचार धारा, अपने प्रभाव की तरंग शरीर की पचास साठ अरब कोशिकाओं तक पहुँचा देती है । हर कोशिका इस तरह से शरीर की दूसरी कोशिका से बात करती है । चिंताग्रसित, तनावपूर्ण और अवसाद से बोझिल मन कुछ ऐसे रसायनों को स्रावित करना है जिससे शरीर में तरह तरह की बिमारियाँ उत्पन्न हो जाती है । इनके प्रभाव से अमाशाय में ज्यादा एसिड बनने लगता है । रक्तवाहिनियों में सिकुड़न उत्पन्न हो जाती है । हृदय की गति बढ़ जाती है । रक्तचाप उच्च हो जाता है ।

अगर मन में शांति है, अच्छे विचार है और मन प्रफुल्ल है तो हाइपाथालमस से इंडोरफीन उत्पन्न होता है, जिसके प्रभाव में शरीर स्वस्थ और सुखी रहता है । शरीर की निरोगता और रूग्णता में ऐसे न्यूरोपेपटाइडो का महत्व चिकित्सा विज्ञान की समझ से अब परे नहीं रह गया है ।


अपनी नकारात्मक शैली बदल लें

तनाव के क्षण जिंदगी में आते रहेंगे । ऐसे पल एक चुनौती है । वह इस तरह कि हम इस तनाव को किस तरह लेत हैं । हमारे रियेक्शन पर हमारे हृदय का स्वास्थ्य निर्भर करना है । अगर नीरस और बोझिल स्थिति को बरकरार रखा जाए तो मस्तिष्क गलत जौव रसायनों को उत्पन्न करता है । इस बात की संभावना है कि स्ट्रेस से निबटने के लिए हम अपनी नकारात्मक शैली बदल लें ।
सोच लें एक व्यक्ति हम से इस तरह पेश आता है जैसा हम पसंद नहीं करते, वह गाली देता है, बदसलूकी करता है । हम उत्तेजित होकर रियेक्ट कर सकते हैं या मुस्कराकर शांतिपूर्वक समाधान सोच सकते हैं । अब इस छोटी सी बात का असर भयानक हो सकता है । अगर आप एनजाइना के रोगी हैं, आपकी कोरनरी आरटरीज एथरोस्केलोरिसिस से संकरी हो चुकी है, मधुमेह,ध्रमपान और व्यायाम के अभाव में रिस्क फैक्टर आप से मौजूद है तो इस क्षणिक उत्तेजना के कारण शरीर में इतना एडरीनालीन स्रावित हो सकता है कि रक्तचाप उच्च हो जाए, हृदय की गति बढ़ जाये और रसायनिक प्रक्रिया के फलस्वरूप ह्रदय-आघात हो जाए ।
अगर मन में शांति है, अच्छे विचार है और मन प्रफुल्ल है तो हाइपोथालमस से इंडोरफीन उत्पन्न होता है, जिसके प्रभाव में शरीर स्वस्थ और सुखी रहता है । शरीर की निरोगता और रूग्णता में ऐसे न्यूरोपेपटाइडो का महत्व चिकित्सा विज्ञान की समझ से अब परे नहीं रह गया है ।
इस अवस्था के लिए कौन जिम्मेवार है वह व्यक्ति जिसने आपसे बदसलूकी की और आप उत्तेजित हो गये या स्वयं आपका गलत रियेक्शन ? ऐसे नकारात्मक उदवेग जिन जैव रसायनों को शरीर में उत्पन्न कराते हैं,अगर उनकी मात्रा शरीर में बार-बार दुहराते गये नकारात्मक उद्वेगों के कारण बढ़ती रहे तो अन्ततः शरीर की रक्षात्मक इम्यून प्रणाली फेल हो जाती है और हृदय आघात के अलावा पेपटिक अल्सर,रूमात्वाड अर्थराटीस और कैंसर जैसी बिमारियां हो सकती हैं ।
दिमाग में सूकून हो, मन अच्छी भावनाओं से भरा हो, प्यार मोहब्बत की शीतल बयार जहां बह रही हो वहां हम न केवल अपने आपको स्वस्थ रखते हैं बल्कि इन स्वस्थ तरंगों से हमारे आसपास के लोगों पर भी असर पड़ता है।


एक प्रयोग

एक बार एक प्रयोग किया गया । खरगोशों के दो दल बनाए गये । कोलेस्टोरोल की अधिकता वाला भोजन देकर खरगोशों की कोरोनरी आर्टरिज पर पड़े प्रभाव का अध्ययन किया । खरगोश मनुष्य की तरह ही हृदय आघात से पीड़ित हो सकते हैं । खरगोशों के दोनों दलों को एक तरह का भोजन दिया गया । किंतु एक दल को लाड- प्यार से रखा गया, उनको दुलारा और पुचकारा गया और दूसरे दल को यूँ ही छोड़ दिया गया । उनकी कोई खातिर नहीं की गयी । अध्ययन के अंत में खरगोशों को मार कर उनके कोरोनरी आर्टरी की जांच की गयी । जिस दल के खरगोशों को यूँ ही छोड़ दिया गया था उनकी कोरनरी आर्टरी में हृदय आघात को उत्पन्न करने वाली एथरोस्केलोरासिस की अवस्था पैदा हो गयी थी । प्यार से रखे गये खरगोशों में ऐसी अवस्था साठ प्रतिशत कम पायी गयी । इस प्रयोग को तीन बार दुहराया गया और एक ही तरह का निष्कर्ष निकला ।


आप अपने शरीर की प्रणाली को मूर्ख नहीं बना सकते

एक आदमी खाने के टेबुल पर क्रोध में खाना खाए तो पाचन पर बहुत बुरा प्रभाव पड़ता है ।ऐसे आवेगों को मामूली न समझें । आप अपने शरीर की प्रणाली को मूर्ख नहीं बना सकते । स्ट्रेस की स्थिति हृदय की पूरी क्रिया पर खतरनाक असर करती है । यह स्ट्रेस है क्या चीज? वास्तविक या काल्पनिक स्थिति से निबटने में मस्तिषक की यह एक विशिष्ट अवस्था है ।

अनादि काल से मनुष्य स्ट्रेस के साथ रहा है मगर आज के आधुनिक प्रतिस्पर्धा के युग में स्ट्रेस की कोई सीमा नहीं रही है-खासकर विकासशील देशों में । स्मरण रहे स्ट्रेस जीवन की गतिशीलता और उन्नति के लिए आवश्यक भी है । यह एक चैलेंज है इसीलिए स्ट्रेस की स्थिति आते ही अच्छा यह होगा की हम थोऱी देर के लिए चुपचाप बैठे और यह सोंचे कि इस स्थिति में क्या किया जा सकता है । बजाए इसके कि उत्तेजित होकर अवसाद में घिरे रहें, क्रोध में उबलते रहे, हम यह प्रयत्न करें कि स्ट्रेस की स्थिति हमारे लिए एक नया अवसर लेकर आयी है और अच्छे ढंग से हमें अपने कार्य का संपादन करना है ।


जिन्दगी का गणित निराला है

कर्म करने के लिए विधाता ने हमें स्वतंत्र रखा है फल उसके हाथ में है । ऐसा होता है कई बार कि जितना हम मेहनत की बात करते हैं, उतना फल मिलता नहीं । जिन्दगी का गणित निराला है और मनुष्य की बुद्धि के बाहर है । अपनी सीमा को समझें और निराशा की स्थिति से बचें ।

शरीर में अच्छे मैसेन्जर न्यूरोपेपटाइ बने इसके लिए अपने भौतिक जीवन में सुखी और स्थिर मन का सृजन करें, इससे शरीर की इम्यून शक्ति अच्छी होगी और हृदयाघात के अलावे अन्य कई बीमारियों से बचाव होगा । ध्यान (मेडिटेशन) प्राणायम और योगासन मन की शांति के लिए और स्ट्रेस से उबरने के लिए आवश्यक है । ध्यान के अभ्यास से कठिन से कठिन स्ट्रेस को शांतिपूर्वक झेला जा सकता है । जीवन को थोड़ा दार्शनिक आयाम देना जरूरी है । इस जगत में रोज सूरज अप्रतिम आभा से उदित होता है, ग्रह नक्षत्र अपनी धुन में गतिमान है, आवारा बादल पागल हवाएं, मदमस्त भौरें और कितने ही नजारें चारों और नर्तन करते हैं, थोड़ी देर देवता के इस काव्य को देखने, सुनने और समझने का प्रयास करें । इससे तनाव से मुक्ति मिलेगी और अन्तर से खुशी के फव्वारे छूटेंगे ।


अन्तत:

स्ट्रेस-मैनेजमेंट की महत्ता को समझाने के केन्द्र यदि खोले जाएं तो हृदय आघात से बचाव की दिशा में यह एक सार्थक कदम होगा । हृदय रोग के विकसित अस्पतालों को खोलने के बजाए ऐसे केन्द्रों की उपयोगिता अन्ततः कहीं ज्यादा होगी ।